Thursday, 7 June 2012

आखिर क्यूँ?

दुःख होता है जब भारत में औरंगजेब रोड देखता हूँ, दुःख होता है जब मुगलों के धर्म निरपेक्षता के किस्से सुनता हूँ, दुःख होता है जब इतिहासकार यह बताने से कतरा जाते हैं की मुल्लो ने कैसे अधार्मिक और अनैतिक इंसानियत को देहला देने वाले काण्ड करे! हास्यप्रद लगता है जब जब हमारे इतिहासकार मुगलों की प्रशंसा के पुल बांध देते हैं इस हद्द तक की वह झूठ बोलने लगते हैं! अकबर ने एक हिन्दू लड़की से शादी की सिर्फ इसलिए उसें धर्म निरपेक्ष दिखाया जाता है परन्तु कोई यह नहीं बताता की चित्तोड़ पर विजय प्राप्त करने के बाद अकबर ने एक बड़ा नरसंहार करवाया था जिसमे ३०,००० हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया था! यह कोई इतिहासकार क्यों नहीं बताता? क्यों नहीं बताया जाता कि मुल्ले अधिकतर युद्ध धोखाधड़ी करके ही जीते थे!
उसको छोडिये यह तक नहीं बताया जाता कि जब भारत पर ७३४ इसवी में मुल्लो ने आक्रमण हुआ था तब राजस्थान में एक ऐसा योद्धा पैदा हुआ था जिसने मुल्लो को मार मार के वापस उनके देश तक खदेड़ा था! उसने अरबी, तुर्क और फारसी मुल्लो के दिल में इतनी दहशत भर दी थी कि मुल्लो ने अगले ४०० साल तक हिंदुस्तान कि ओर आँख उठा के नहीं देखा! यह योद्धा थे मेवाड़ वंश के संथापक 'बाप्पा रावल' कालभोज के राजकुमार ! शिव के एकलिंग रूप के भक्त और चित्तोड़ के किले के निर्माता! उनके पिता महेंद्र रावल द्वितीय की आक्रमणकारियों के हत्या की थी और उनकी माता जी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए सटी हो गयी थी! बाप्पा रावल का पालन पोषण उनके कुलपुरोहित ने बड़े प्यार से किया और एकलिंग जी की भक्ति के साथ साथ समस्त युद्ध लालाओ में निपुण बनाया! बाप्पा रावल ने अपना खोया हुआ राज्य मात्र २१ साल की उम्र में वापस ले लिए था..और एक कुशल शासक के रूप में अपने को स्थापित किया! बाद में जब अरब, तुर्कों और फारसियो ने आक्रमण किया तो बाप्पा रावल ने न केवल उन्हें युद्ध में हराया बल्कि अरबो को वापस उनके देश तक खदेड़ा! ऐसा था बप्पा रावल का खौफ की मुल्लो ने अगले ४००० साल भारत की ओर आँख उठा कर देखने तक की हिम्मत नहीं की! परन्तु हमारे इतिहास कार मौन हैं! आखिर क्यूँ?
उसको छोडिये यह तक नहीं बताया जाता कि जब भारत पर ७३४ इसवी में मुल्लो ने आक्रमण हुआ था तब राजस्थान में एक ऐसा योद्धा पैदा हुआ था जिसने मुल्लो को मार मार के वापस उनके देश तक खदेड़ा था! उसने अरबी, तुर्क और फारसी मुल्लो के दिल में इतनी दहशत भर दी थी कि मुल्लो ने अगले ४०० साल तक हिंदुस्तान कि ओर आँख उठा के नहीं देखा! यह योद्धा थे मेवाड़ वंश के संथापक 'बाप्पा रावल' कालभोज के राजकुमार ! शिव के एकलिंग रूप के भक्त और चित्तोड़ के किले के निर्माता! उनके पिता महेंद्र रावल द्वितीय की आक्रमणकारियों के हत्या की थी और उनकी माता जी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए सटी हो गयी थी! बाप्पा रावल का पालन पोषण उनके कुलपुरोहित ने बड़े प्यार से किया और एकलिंग जी की भक्ति के साथ साथ समस्त युद्ध लालाओ में निपुण बनाया! बाप्पा रावल ने अपना खोया हुआ राज्य मात्र २१ साल की उम्र में वापस ले लिए था..और एक कुशल शासक के रूप में अपने को स्थापित किया! बाद में जब अरब, तुर्कों और फारसियो ने आक्रमण किया तो बाप्पा रावल ने न केवल उन्हें युद्ध में हराया बल्कि अरबो को वापस उनके देश तक खदेड़ा! ऐसा था बप्पा रावल का खौफ की मुल्लो ने अगले ४००० साल भारत की ओर आँख उठा कर देखने तक की हिम्मत नहीं की! परन्तु हमारे इतिहास कार मौन हैं! आखिर क्यूँ?

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